
हर त्योहार का अपना विशेष महत्त्व होता है, और धनतेरस उन त्योहारों में से एक है जो दीपावली की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन धन, आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लोग इस दिन माँ लक्ष्मी, भगवान कुबेर और धन्वंतरि की पूजा करते हैं ताकि उनके जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहे। आइए इस ब्लॉग में जानते हैं धनतेरस से जुड़ी परंपराएँ, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, खरीदारी से जुड़े सुझाव और रोचक तथ्य।
धनतेरस क्या है और क्यों मनाया जाता है?
भारत त्योहारों की भूमि है, जहाँ हर पर्व का अपना एक विशेष महत्त्व और उद्देश्य होता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण त्योहार है धनतेरस, जो दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला यह पर्व धन, स्वास्थ्य और समृद्धि से जुड़ा हुआ है। इस दिन पूरे देश में हर्षोल्लास का माहौल रहता है, घरों को सजाया जाता है और बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। माना जाता है कि धनतेरस के दिन की गई पूजा और खरीदारी पूरे वर्ष के लिए शुभ फल देती है।

धनतेरस शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, “धन” अर्थात समृद्धि और “तेरस” अर्थात तिथि (त्रयोदशी)। इस दिन का उल्लेख प्राचीन धर्मग्रंथों और पुराणों में मिलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि का अवतार इसी दिन हुआ था। धन्वंतरि देव अमृत कलश लेकर प्रकट हुए और उन्होंने देवताओं को अमरत्व प्रदान किया। इसलिए धनतेरस को स्वास्थ्य और दीर्घायु से भी जोड़ा जाता है। यह दिन न केवल भौतिक सुख-संपत्ति के लिए बल्कि मानसिक और शारीरिक कल्याण के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
आधुनिक समय में भी धनतेरस का महत्त्व कम नहीं हुआ है। जहाँ पहले लोग पारंपरिक रूप से पूजा-पाठ और दीपदान करते थे, वहीं आज यह दिन आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी खास बन गया है। लोग नई चीज़ें खरीदते हैं, व्यवसाय में निवेश करते हैं और इसे एक नई शुरुआत का शुभ अवसर मानते हैं। इस तरह धनतेरस परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम बन गया है।
धन्वंतरि भगवान का प्रकट होना और अमृत कलश की महिमा
धनतेरस की सबसे प्रसिद्ध कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। देवताओं और असुरों ने मिलकर अमृत प्राप्ति के लिए क्षीर सागर का मंथन किया था। मंथन से 14 अमूल्य रत्न निकले, जिनमें से एक भगवान धन्वंतरि थे। वे अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए और उन्होंने आयुर्वेद का ज्ञान दिया, जिससे रोगों का उपचार संभव हुआ। यही कारण है कि धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा विशेष रूप से की जाती है ताकि जीवन में स्वास्थ्य, दीर्घायु और रोगमुक्ति बनी रहे।

आयुर्वेद के जनक माने जाने वाले धन्वंतरि देव के इस अवतार का संदेश यह है कि असली धन शरीर और स्वास्थ्य में निहित है। जब व्यक्ति स्वस्थ रहता है तो वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है। इसीलिए कई आयुर्वेदिक संस्थान इस दिन को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाते हैं। स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं, निःशुल्क परामर्श दिया जाता है और आयुर्वेद के महत्त्व को जन-जन तक पहुँचाया जाता है।
इसके अतिरिक्त, यह कथा हमें यह भी सिखाती है कि अमृत या दीर्घायु केवल देवताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि भगवान धन्वंतरि ने इसे पूरी मानवता के लिए सुलभ बनाया। आज भी धनतेरस पर लोग आयुर्वेदिक औषधियाँ खरीदते हैं, स्वास्थ्य संबंधी वस्तुएँ लेते हैं और इस दिन को एक तरह से स्वास्थ्य आराधना दिवस के रूप में मानते हैं।
धनतेरस 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त और आधुनिक महत्त्व
धनतेरस 2025 इस वर्ष सोमवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि 19 अक्टूबर की रात से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर की रात तक रहेगी। इस दिन को दीपावली उत्सव का पहला दिन माना जाता है और इसका महत्त्व अत्यधिक है। धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि की विशेष पूजा की जाती है।
शुभ मुहूर्त के अनुसार, धनतेरस की पूजा और खरीदारी संध्या के समय करना सबसे उत्तम माना गया है। इस समय देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कई ज्योतिषाचार्य इस दिन की तिथि और समय के अनुसार पूजा विधि में सुझाव देते हैं, जिससे धन और समृद्धि की प्राप्ति में वृद्धि होती है। घर के प्रवेश द्वार, पूजा स्थल और मुख्य कमरे की सफाई और सजावट पहले ही कर लेना शुभ माना जाता है। दीपक और रंगोली से घर को सजाने की परंपरा इस दिन का अभिन्न हिस्सा है।

आधुनिक समय में धनतेरस केवल धार्मिक पर्व नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यवसाय, आर्थिक गतिविधियाँ और सामाजिक उत्सव का भी महत्वपूर्ण दिन बन गया है। लोग इस दिन नई चीज़ें खरीदते हैं जैसे सोना, चांदी, बर्तन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स। बिज़नेस के लिए नए प्रोजेक्ट या निवेश की शुरुआत भी धनतेरस पर करना शुभ माना जाता है। बाजारों और मॉल में विशेष ऑफ़र और सेल का आयोजन होता है, जिससे खरीदारी और उत्सव दोनों का आनंद मिलता है।
इसके अतिरिक्त, आज के डिजिटल युग में लोग सोशल मीडिया पर भी इस दिन की शुभकामनाएँ साझा करते हैं। #HappyDhanteras जैसे हैशटैग के माध्यम से लोग एक-दूसरे को धनतेरस की शुभकामनाएँ भेजते हैं और अपने घरों की सजावट, पूजा या खरीदारी की तस्वीरें साझा करते हैं। इस तरह, धनतेरस अब पारंपरिक मान्यताओं और आधुनिक जीवनशैली का संगम बन गया है। यह पर्व हमें न केवल भौतिक समृद्धि की याद दिलाता है बल्कि स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और परिवारिक एकता का संदेश भी देता है।
धनतेरस और लक्ष्मी पूजन: धन-संपदा का स्वागत
धनतेरस का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पहलू है, माँ लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा। यह दिन धन, वैभव और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति विधिवत लक्ष्मी-कुबेर की पूजा करता है, उसके घर में वर्ष भर लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है। शाम को घरों की सजावट, दीपों की रोशनी और रंगोलियों से पूरा वातावरण पवित्र और आकर्षक बन जाता है। मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर लक्ष्मी जी का स्वागत किया जाता है ताकि वे घर में प्रवेश कर आशीर्वाद दें।

इस दिन खरीदारी करना शुभ माना जाता है। पारंपरिक रूप से लोग सोना, चांदी, सिक्के, बर्तन, वाहन या नई संपत्ति खरीदते हैं। ऐसा माना जाता है कि धनतेरस पर खरीदी गई वस्तुएँ माँ लक्ष्मी की कृपा का प्रतीक होती हैं और घर में समृद्धि लाती हैं। कई लोग अपने व्यवसाय में नई योजनाओं की शुरुआत भी इसी दिन करते हैं क्योंकि यह दिन नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ होता है।
पूजा विधि भी इस दिन खास होती है। गंगाजल से शुद्धिकरण, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, सिक्कों और माँ लक्ष्मी के चरणों में चांदी के बर्तन रखने जैसी परंपराएँ निभाई जाती हैं। लक्ष्मी-कु
धनतेरस 2025 में यम दीपदान की परंपरा और राजा हेम की कथा
धनतेरस के दिन की जाने वाली सबसे विशेष परंपराओं में से एक है यम दीपदान। यह परंपरा सदियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। मान्यता है कि धनतेरस की संध्या को यमराज को प्रसन्न करने और अकाल मृत्यु से रक्षा पाने के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है। यह दीप विशेष रूप से दक्षिण दिशा की ओर जलाया जाता है, क्योंकि यमराज को दक्षिण दिशा का स्वामी माना गया है। यह दीपक परिवार की सुरक्षा, दीर्घायु और सौभाग्य का प्रतीक बन जाता है। यम दीपदान न केवल धार्मिक मान्यता से जुड़ा है, बल्कि यह हमें जीवन की अस्थिरता और प्रकाश के महत्व की भी याद दिलाता है।

इस परंपरा के पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, राजा हेम के पुत्र की कहानी। कहा जाता है कि राजा हेम के पुत्र की जन्मकुंडली में भविष्यवाणी की गई थी कि विवाह के चौथे दिन उसकी मृत्यु सर्पदंश से होगी। जब वह दिन आया, पुत्रवधू ने पति की रक्षा के लिए एक अनोखी युक्ति अपनाई। उसने अपने महल के द्वार पर असंख्य दीपक जलाए, घर को सोने-चांदी के गहनों से सजाया और चौखट पर ढेर सारे आभूषण व सिक्के रख दिए। जब यमराज सर्प के रूप में वहाँ पहुँचे, तो चारों ओर की तेज रोशनी और चमक से उनकी आँखें चकाचौंध हो गईं। वे कमरे में प्रवेश न कर सके और बिना कुछ किए ही लौट गए। इस प्रकार राजा हेम के पुत्र का जीवन बच गया।
इस घटना के बाद से ही धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा प्रारंभ हुई। आज भी लोग संध्या के समय मिट्टी या पीतल के दीपक में तिल का तेल भरकर उसे घर के बाहर, विशेष रूप से दक्षिण दिशा में जलाते हैं। दीपक के पास यमराज को समर्पित एक छोटा सा नैवेद्य या जल भी रखा जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार को अकाल मृत्यु तथा अनहोनी से सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह परंपरा हमें यह भी सिखाती है कि प्रकाश और श्रद्धा से नकारात्मक शक्तियों पर विजय पाई जा सकती है। आधुनिक समय में भी यह परंपरा पूरे भारत में श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ निभाई जाती है।
आधुनिक समय में धनतेरस का महत्त्व
आधुनिक युग में धनतेरस ने एक नया स्वरूप भी ग्रहण कर लिया है। जहाँ पारंपरिक पूजा-पाठ, दीपदान और धार्मिक मान्यताएँ अपनी जगह कायम हैं, वहीं अब यह दिन आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक उत्सवों के लिए भी विशेष बन गया है। लोग बड़े-बड़े मॉल, बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर विशेष ऑफ़र का लाभ उठाते हैं। वाहन, गहने, प्रॉपर्टी और इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री में इस दिन असाधारण वृद्धि होती है।

सोशल मीडिया के दौर में लोग #HappyDhanteras जैसे हैशटैग के साथ शुभकामनाएँ साझा करते हैं, घर की सजावट की तस्वीरें पोस्ट करते हैं और अपने प्रियजनों को शुभकामनाएँ भेजते हैं। यह दिन अब केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक उत्सव और आर्थिक उमंग का प्रतीक बन गया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धनतेरस हमें जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का संदेश देता है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि असली धन केवल भौतिक संपत्ति में नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, पारिवारिक एकता और आंतरिक प्रकाश में निहित है। यही कारण है कि प्राचीन परंपराओं और आधुनिक जीवनशैली के बीच धनतेरस आज भी उतनी ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है?
धनतेरस के दिन कुछ विशेष वस्तुएँ खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह माँ लक्ष्मी और भगवान कुबेर को प्रसन्न करने का प्रतीक है। पारंपरिक रूप से इस दिन सोना, चांदी, सिक्के, आभूषण, बर्तन और कीमती धातुएँ खरीदी जाती हैं। माना जाता है कि धनतेरस पर खरीदी गई वस्तुएँ पूरे वर्ष घर में समृद्धि और सौभाग्य लाती हैं। आज के समय में लोग इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन और प्रॉपर्टी की भी खरीदारी करते हैं, लेकिन खरीदारी हमेशा शुभ मुहूर्त देखकर करनी चाहिए। पूजा में उपयोग होने वाले तांबे या चांदी के बर्तन, दीपक और पूजन सामग्री लेना भी अत्यंत मंगलकारी होता है।
धनतेरस को दीप क्यों जलाया जाता है?
धनतेरस की संध्या को घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीप जलाने की परंपरा को यम दीपदान कहा जाता है। यह परंपरा राजा हेम के पुत्र की प्रसिद्ध कथा से जुड़ी है, जिसमें यमराज को सर्प रूप में रोकने के लिए द्वार पर दीपों और आभूषणों से इतनी रोशनी की गई कि वे बिना कुछ किए लौट गए। तब से यह माना जाने लगा कि धनतेरस की रात यमराज के लिए दीप जलाने से परिवार पर अकाल मृत्यु या अनहोनी का संकट नहीं आता। यम दीपदान सुरक्षा, दीर्घायु और शुभता का प्रतीक है और इसे पूर्ण श्रद्धा और विधि से किया जाता है।
धनतेरस पर कौनसी पूजा की जाती है?
धनतेरस के दिन मुख्य रूप से माँ लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। शाम को शुभ मुहूर्त में घर की साफ-सफाई के बाद दीपक जलाकर पूजा स्थान सजाया जाता है। गंगाजल से शुद्धिकरण किया जाता है और पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और चांदी के सिक्कों से पूजा अर्चना की जाती है। भगवान धन्वंतरि की आराधना स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए की जाती है, जबकि लक्ष्मी-कुबेर की पूजा धन, वैभव और समृद्धि के लिए की जाती है। पूजा के बाद दीपक जलाकर पूरे घर को रोशन किया जाता है ताकि सकारात्मक ऊर्जा और माँ लक्ष्मी की कृपा घर में बनी रहे।
क्या धनतेरस पर वाहन खरीदना अच्छा होता है?
हाँ, धनतेरस को वाहन खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन को नई शुरुआत, आर्थिक समृद्धि और लक्ष्मी आगमन का प्रतीक माना जाता है। इसलिए कई लोग इस दिन कार, बाइक, स्कूटी या अन्य वाहन खरीदते हैं। वाहन खरीदने के बाद विशेष रूप से उसकी पूजा की जाती है ताकि वह दुर्घटनाओं से मुक्त रहे और समृद्धि लाए। शास्त्रों के अनुसार धनतेरस का दिन किसी भी प्रकार की स्थायी संपत्ति, सोना-चांदी, इलेक्ट्रॉनिक आइटम या वाहन खरीदने के लिए बहुत ही उत्तम माना गया है।
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