
Diwali, जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि भावनाओं, परंपराओं और खुशियों का एक उजाला भरा पर्व है। हर साल की तरह Diwali 2025 भी नई उमंगों, उम्मीदों और सकारात्मकता के साथ हमारे जीवन में एक नई शुरुआत लेकर आ रही है। जैसे ही अंधेरी अमावस्या की रात दीपों की चमक से जगमगाने लगती है, वैसे ही हर घर में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बन जाता है।
भारत और दुनिया भर में Diwali को “Festival of Lights” के रूप में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, सजावट में रंग भरते हैं और परिवार व दोस्तों के साथ पूजा पाठ व मिठाइयों का आनंद लेते हैं। सड़कों पर रंग-बिरंगी लाइटों की जगमगाहट, रांगोली की खूबसूरती और पटाखों की चमक एक जादुई माहौल बना देती है।
Diwali 2025 सिर्फ एक शुभकामना नहीं, बल्कि एक भावना है, जो हर दिल को रोशन कर देती है और रिश्तों में मिठास घोलती है। 2025 की दिवाली आधुनिक सोच, पर्यावरण-अनुकूल उत्सव और पारंपरिक संस्कृति के संगम से एक नया अध्याय लिखने जा रही है।
Diwali 2025 कब है? तिथि, शुभ मुहूर्त और पंचांग
Diwali 2025 पूरे भारतवर्ष में बड़ी धूमधाम और आस्था के साथ 21 अक्टूबर 2025 (मंगलवार) को मनाई जाएगी। इस दिन कार्तिक माह की अमावस्या तिथि होती है, जो लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, Diwali की रात जब चतुर्दशी समाप्त होकर अमावस्या का आरंभ होता है, तब पूरे वातावरण में एक अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
इसी समय माँ लक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन होता है, इसलिए भक्तजन इस पावन अवसर पर अपने घरों में दीप जलाकर देवी-देवताओं की आराधना करते हैं। इस वर्ष लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त सायं 6:45 बजे से रात 8:25 बजे तक रहने की संभावना है (स्थानीय पंचांग अनुसार समय में हल्का बदलाव संभव है)। इस समयावधि में की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। तिथि विवरण इस प्रकार है:
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 21 अक्टूबर 2025 को सुबह 2:10 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 22 अक्टूबर 2025 को सुबह 12:05 बजे
इस दिन लोग प्रातःकाल से ही घर की सफाई और पूजा की तैयारी में लग जाते हैं। शाम के समय घरों में दीप जलाए जाते हैं, परिवार एक साथ बैठकर माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिवत पूजा करते हैं और समृद्धि की कामना करते हैं। दिवाली के इस विशेष मुहूर्त में पूजा करने से न केवल धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
Diwali का इतिहास क्या है? परंपरा और धार्मिक महत्व
दिवाली का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है और यह भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह त्योहार केवल रोशनी और खुशियों का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसमें ऐसी अनेक पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएँ समाई हुई हैं जो समाज को अच्छाई की जीत और सत्य की शक्ति का संदेश देती हैं।
सबसे प्रमुख मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण का वध करने के बाद माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन पर पूरे अयोध्या नगरी में दीपों की पंक्तियाँ जलाकर भव्य स्वागत किया गया था। उस दिन अमावस्या की रात्रि थी, इसलिए दीपों की रोशनी ने अंधकार को दूर कर एक नई आशा और उत्सव का माहौल बना दिया। यही परंपरा आगे चलकर दीपावली के रूप में हर वर्ष मनाई जाने लगी।

जैन धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर स्वामी ने निर्वाण प्राप्त किया था। यह दिन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए मोक्ष और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक माना जाता है। वहीं, सिख धर्म में भी यह दिन “बंदी छोड़ दिवस” के रूप में मनाया जाता है, जब गुरु हरगोविंद जी ने 52 राजाओं को मुगल बंदीगृह से मुक्त कराया था। इस प्रकार, दिवाली सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं को जोड़ने वाला उत्सव बन गया है।
इसके अलावा, कई मान्यताओं में दिवाली को माँ लक्ष्मी के प्रकट होने का दिन भी माना गया है। समुद्र मंथन के समय माँ लक्ष्मी इसी दिन क्षीर सागर से प्रकट हुई थीं और भगवान विष्णु को अपना वरमाला पहनाई थी। इसलिए दिवाली की रात को धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।
दिवाली का इतिहास हमें यह सिखाता है कि चाहे अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटा सा दीपक भी उसे मिटा सकता है। यह त्योहार अच्छाई की बुराई पर विजय, प्रेम और एकता का प्रतीक बनकर हर वर्ष हमारे जीवन को रोशन करता है।
Diwali मनाने की परंपरा, रीति, रिवाज और उत्सव का तरीका
Diwali एक ऐसा पर्व है जो केवल उत्सव का प्रतीक नहीं बल्कि जीवन में संतुलन, आत्मनिरीक्षण और नई शुरुआत का संदेश देता है। इसे मनाने का उद्देश्य सिर्फ रोशनी फैलाना नहीं बल्कि अपने भीतर और अपने परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। हर घर में दिवाली की पूर्व तैयारी एक प्रकार से मानसिक और आध्यात्मिक तैयारी भी होती है। लोग अपने पुराने कर्ज, अनबुझी शिकायतें और नकारात्मक भावनाओं को पीछे छोड़कर नए साल की तरह अपने जीवन में नया अध्याय शुरू करने का संदेश लेते हैं।
दिवाली के दौरान पूजा का महत्व सिर्फ देवी लक्ष्मी और गणेश जी तक सीमित नहीं है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्मांड में ऊर्जा का प्रवाह अधिक होता है। इसलिए घर के किसी भी कोने में दीपक जलाना, अपने वातावरण को शुद्ध करना और मंत्रों का उच्चारण करना मानसिक शांति और ध्यान के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही, पारिवारिक मेलजोल और छोटे बच्चों के साथ त्योहार मनाना रिश्तों को मजबूत करने का एक अनोखा माध्यम है।

रिवाजों में हर क्षेत्र की अपनी विशेषता देखने को मिलती है। उदाहरण के लिए, पश्चिमी भारत में लोग सप्तमी और अष्टमी की तैयारी के साथ दीपों और फूलों से घर सजाते हैं, जबकि पूर्वी भारत में दिवाली को काली पूजा के रूप में मनाया जाता है। दक्षिण भारत में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की परंपरा अधिक प्रचलित है। यह दिखाता है कि दिवाली का उत्सव सिर्फ एक दिन का पर्व नहीं बल्कि पूरे समाज और क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को एक साथ जोड़ने वाला अनुभव है।
आज की आधुनिक दुनिया में भी, दिवाली मनाने का असली उद्देश्य वही रहता है, घर और दिल को साफ रखना, अपने रिश्तों में मिठास बनाए रखना और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना। यही कारण है कि इस पर्व को केवल रोशनी और पटाखों तक सीमित नहीं माना जाता। वास्तविक रूप में दिवाली एक अंदरूनी प्रकाश और सकारात्मकता की जागरूकता का प्रतीक है, जो हर साल नए सिरे से हमारे जीवन में नए अवसर, प्रेम और खुशियाँ लेकर आती है।
Diwali के लिए घर सजावट के बेस्ट आइडिया
Diwali का त्योहार घरों में रोशनी और खुशियों की बहार लाता है, और इसके साथ ही घर की सजावट का महत्व भी बढ़ जाता है। 2025 की दिवाली में सजावट का ट्रेंड सिर्फ दिखावटी नहीं बल्कि टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक सोच के अनुरूप होगा। इस साल लोग पारंपरिक सजावट को आधुनिक एलईडी लाइट्स, सोलर स्ट्रिंग लाइट्स और क्रिएटिव DIY (Do It Yourself) आइडियाज के साथ जोड़कर अपने घरों को और भी खास बना रहे हैं।
घर की सजावट की शुरुआत मुख्य द्वार से होती है। रंग-बिरंगे तोरण और हैंडमेड गहनों से सजाए गए दरवाजे आने वाले मेहमानों का स्वागत करते हैं, और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। घर के आंगन और हॉल में फ्लोरल रांगोली और थीम-बेस्ड रंगोली का प्रयोग इस साल बेहद पॉपुलर रहेगा। फूलों और रंगीन पाउडर का मेल रचनात्मकता के साथ एक जीवंत माहौल बनाता है।

दीपावली के लिए दीपक और लाइटिंग का महत्व हमेशा से रहा है। मिट्टी के पारंपरिक दीये, एलईडी स्ट्रिंग लाइट्स और सोलर लाइटिंग का संगम घर को दिनभर जगमग और रातभर रोशन बनाए रखता है। इन लाइट्स को घर के हर कोने में, बालकनी में और बगीचे में सजाना, घर को एक फेस्टिव और मनमोहक लुक देता है।
इस साल क्रिएटिव डेकोरेशन में थीम-बेस्ड सजावट का रुझान भी बढ़ा है। उदाहरण के लिए, गोल्डन थीम, व्हाइट और पेस्टल कलर थीम या पारंपरिक भारतीय शिल्प कला के आधार पर सजावट करना बहुत ट्रेंड में है। साथ ही, हैंडमेड मोमबत्तियाँ और कैंडल स्टैंड्स छोटे-छोटे कॉर्नर को आकर्षक बनाते हैं और घर में एक अद्भुत सजीवता भरते हैं।
दिवाली सजावट का सबसे खास पहलू यह है कि यह केवल दिखाने के लिए नहीं बल्कि घर और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और खुशियों की बहार लाने का माध्यम है। सजावट में प्रयोग किए जाने वाले हर रंग, हर दीपक और हर फूल का उद्देश्य यही है कि घर के हर सदस्य का मन प्रसन्न और उत्साहित रहे। इस तरह, 2025 की दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि घर और दिल दोनों को रोशन करने का अवसर बनकर हमारे जीवन में नई खुशियों का प्रवेश करती है।
Eco-Friendly Diwali – Green Celebration Ideas
दिवाली का त्योहार अपनी रौशनी, खुशियों और रंग-बिरंगी सजावट के लिए जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह साफ़ हो गया है कि पटाखों और अत्यधिक बिजली खपत वाली सजावट के कारण वातावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। Eco-Friendly Diwali 2025 का मतलब सिर्फ पटाखों से दूर रहना नहीं है, बल्कि यह त्योहार इस बार पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का संदेश भी देगा। इस साल लोग मिट्टी के दीयों, सोलर लाइट्स और बायोडिग्रेडेबल सजावट का इस्तेमाल करके अपनी दिवाली को पूरी तरह हरियाली और प्राकृतिक रूप से मनाने पर ध्यान दे रहे हैं।
घर की सजावट में रीसायकल और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। पुराने कपड़े, कागज़ और प्राकृतिक फूलों से तैयार किए गए तोरण और हैंगिंग्स घर को आकर्षक बनाने के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा का संदेश भी देते हैं। LED लाइट्स और सोलर लाइटिंग का उपयोग बिजली की बचत करता है और घर को लंबे समय तक रोशन रखता है। इस तरह की सजावट केवल सुंदर दिखती ही नहीं, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी होती है।

दिवाली के दिन पटाखों का अत्यधिक इस्तेमाल न केवल वायु प्रदूषण बढ़ाता है, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होता है। इस वजह से 2025 में कई लोग “Silent Diwali” और “Green Diwali” का चयन कर रहे हैं। इस दौरान केवल दीप, मोमबत्तियाँ और LED लाइट्स का प्रयोग करके उत्सव मनाया जाता है, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है और घर का माहौल भी शांत और सुखद होता है।
इसके अलावा, गिफ्टिंग और सजावट में भी पर्यावरण-अनुकूल विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लोग DIY गिफ्ट्स, पौधों, ऑर्गैनिक मिठाइयों और नेचुरल पेंट वाले डेकोरेशन आइटम्स का प्रयोग कर रहे हैं। यह न केवल अनोखी और आकर्षक सजावट देता है, बल्कि बाद में इसे प्रकृति में सुरक्षित तरीके से निपटाया जा सकता है। इस तरह, Eco-Friendly Diwali 2025 सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि जागरूकता, जिम्मेदारी और स्थायी खुशियों का प्रतीक बन गई है।
Eco-Friendly Diwali हमें यह सिखाती है कि त्योहारों की खुशियाँ तभी स्थायी और सार्थक होती हैं, जब हम अपने पर्यावरण, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए सही विकल्प अपनाएँ। इस दिवाली, अपने घर, शहर और समाज को हरित और सुरक्षित बनाने का संदेश दें और एक नई, सकारात्मक शुरुआत करें।
Diwali में शॉपिंग और गिफ्टिंग आइडियाज
दिवाली सिर्फ रोशनी और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह शॉपिंग और गिफ्टिंग का भी सबसे बड़ा अवसर होता है। हर घर में इस समय न केवल घर सजाने की तैयारियाँ चल रही होती हैं, बल्कि परिवार और दोस्तों के लिए उपहार चुनने की भी हलचल रहती है। 2025 की दिवाली में शॉपिंग ट्रेंड कुछ नए और रचनात्मक रूप में सामने आए हैं। लोग अब पारंपरिक वस्त्रों और मिठाइयों के साथ-साथ क्रिएटिव, पर्सनलाइज्ड और टिकाऊ गिफ्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इस साल फैशन और कपड़ों में एथनिक वियर का बोलबाला रहेगा। साड़ी, कुर्ता-पायजामा, लेहंगा और इथनिक वेस्टर्न मिक्स जैसे आउटफिट्स दिवाली के समय बहुत पसंद किए जा रहे हैं। इसके अलावा ज्वेलरी और एक्सेसरीज में सिंपल, माडर्न और लाइटवेट डिजाइन ट्रेंड में हैं, जो न सिर्फ सुंदर दिखती हैं बल्कि रोज़मर्रा के इस्तेमाल में भी सुविधाजनक होती हैं।

गिफ्टिंग के क्षेत्र में भी यूनिक और पर्सनलाइज्ड विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लोग अब दोस्तों और परिवार के लिए हैंडमेड गिफ्ट बॉक्स, फोटो फ्रेम, पर्सनलाइज्ड मेटल और ग्लास आइटम्स, पौधों वाले पैकेज और ऑर्गैनिक मिठाइयों का चयन कर रहे हैं। कॉर्पोरेट गिफ्टिंग में भी कस्टमाइज्ड हैम्पर और डिजिटल गिफ्ट कार्ड्स का ट्रेंड बढ़ गया है। इस तरह, हर गिफ्ट न केवल उपयोगी होता है बल्कि यादगार और व्यक्तिगत भी बन जाता है।
ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर दिवाली के लिए स्पेशल ऑफर्स और डिस्काउंट की भरमार रहती है। 2025 में लोग समय और पैसे की बचत के लिए ऑनलाइन खरीदारी को प्राथमिकता देंगे। इसके अलावा, घर बैठे DIY डेकोरेशन आइटम्स और कस्टम गिफ्ट्स बनाना भी इस साल का नया ट्रेंड बन गया है, जो रचनात्मकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।
दिवाली शॉपिंग और गिफ्टिंग का असली मकसद केवल खरीदारी करना नहीं, बल्कि अपने प्रियजनों के लिए खुशियाँ और स्मृतियाँ बनाना है। 2025 की दिवाली में ट्रेंडिंग गिफ्ट्स और शॉपिंग आइडियाज हमें यह सिखाते हैं कि छोटे लेकिन अर्थपूर्ण उपहार भी रिश्तों में मिठास घोल सकते हैं और त्योहार को यादगार बना सकते हैं।
Diwali में कॉर्पोरेट और फैमिली गिफ्टिंग का ट्रेंड्स
दिवाली केवल घर परिवार के लिए खुशियाँ लाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह कॉर्पोरेट जगत और व्यावसायिक रिश्तों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर बन चुका है। इस समय कंपनियाँ अपने कर्मचारियों, क्लाइंट्स और बिजनेस पार्टनर्स के लिए स्पेशल गिफ्ट हैम्पर तैयार करती हैं। 2025 में गिफ्टिंग का ट्रेंड पारंपरिक उपहारों से आगे बढ़कर पर्सनलाइज्ड और क्रिएटिव विकल्पों की ओर झुक रहा है। इस ट्रेंड में न केवल उपहार की सुंदरता बल्कि उसका व्यक्तिगत और यादगार होना भी अहम माना जाता है।
कॉर्पोरेट गिफ्टिंग में इस बार कस्टमाइज्ड हैम्पर्स काफी लोकप्रिय हैं। इनमें ऑर्गेनिक मिठाइयाँ, हैंडमेड आइटम्स, पर्सनलाइज्ड नोटबुक, कलम सेट, पौधे, डिजिटल गिफ्ट कार्ड्स और छोटे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स शामिल होते हैं। इस तरह के गिफ्ट्स व्यवसायिक रिश्तों को मजबूत बनाने के साथ-साथ कर्मचारियों में उत्साह और अपनापन भी पैदा करते हैं।

परिवार और दोस्तों के लिए गिफ्टिंग का ट्रेंड भी बहुत बदल गया है। अब लोग केवल आम मिठाइयों और वस्त्रों तक सीमित नहीं रहते। पर्सनलाइज्ड गिफ्ट बॉक्स, फोटो फ्रेम, कस्टम मग, नेचुरल कैंडल्स और DIY गिफ्ट आइटम्स इस वर्ष बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं। यह न केवल उपहार को यादगार बनाता है बल्कि इसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति के लिए भावनात्मक मूल्य भी बढ़ाता है।
आज की डिजिटल दुनिया में, ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स ने भी गिफ्टिंग को आसान और ट्रेंडिंग बना दिया है। अब लोग घर बैठे अपने पसंदीदा गिफ्ट को कस्टमाइज कर सकते हैं और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित कर सकते हैं। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि अलग-अलग शहरों और देशों में अपने प्रियजनों को आसानी से उपहार भेजना भी संभव हो जाता है।
इस तरह, कॉर्पोरेट और फैमिली गिफ्टिंग ट्रेंड्स 2025 केवल उपहार देने का तरीका नहीं बल्कि रिश्तों में मिठास, अपनापन और उत्सव की भावना फैलाने का माध्यम बन गए हैं। पर्सनलाइज्ड हैम्पर और विचारशील गिफ्टिंग विकल्प इस दिवाली को और भी यादगार और विशेष बनाने में मदद करते हैं।
Diwali में रंगोली डिज़ाइन के आइडियाज
दिवाली का त्योहार रंगों, रोशनी और खुशियों का प्रतीक है, और रंगोली इसे और भी जीवंत बनाती है। रंगोली सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और सौभाग्य लाने का प्रतीक भी मानी जाती है। 2025 की रंगोली में पारंपरिक डिज़ाइनों के साथ-साथ आधुनिक और क्रिएटिव पैटर्न को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस साल के ट्रेंड में थीम-बेस्ड रंगोली, जैसे गोल्डन और पेस्टल कलर थीम, फुल पैटर्न, geometric डिज़ाइन और मॉडर्न आर्ट स्टाइल रैंकिंग में सबसे ऊपर हैं। लोग स्टैंसिल और डिजिटल रंगोली तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे कम समय में सुंदर और परफेक्ट डिज़ाइन बनाया जा सकता है।

सस्टेनेबल और पर्यावरण-अनुकूल रंगोली सामग्री का प्रयोग भी बढ़ रहा है। प्राकृतिक रंग, चावल, बेसन, सूखे फूल और मसाले जैसे हल्दी और लाल मिर्च पाउडर का इस्तेमाल करके रंगोली बनाई जा रही है। यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि घर में एक प्राकृतिक और ताजगी भरा माहौल भी लाती है।
रंगोली अब सिर्फ मुख्य द्वार या पूजा स्थल तक सीमित नहीं रह गई है। लोग इसे आंगन, बालकनी, गार्डन और स्टेप्स तक फैला रहे हैं। छोटे-छोटे diy एलिमेंट्स जैसे मोमबत्तियाँ, कैंडल्स और LED लाइट्स के साथ रंगोली को सजाकर घर को और भी आकर्षक और फेस्टिव बनाया जा सकता है।
रंगोली डिज़ाइन 2025 यह दिखाती है कि कैसे परंपरा और आधुनिकता का संगम एक साथ त्योहार को खूबसूरत और यादगार बना सकता है। यह न केवल दिवाली की रौनक बढ़ाती है बल्कि परिवार और बच्चों में रचनात्मकता और उत्साह भी जगाती है।
Diwali के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
Diwali केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि लाने का एक विशेष अवसर है। इस दिन घर की साफ-सफाई करना, पुराने और अनावश्यक सामान को हटाना और हर कोने को सजाना केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि साफ और सुव्यवस्थित घर में माता लक्ष्मी का वास होता है और घर में सुख-शांति और धन की वृद्धि होती है। इसी वजह से दिवाली के दिन पूरे परिवार के साथ मिलकर घर सजाना, रंगोली बनाना और दीपक जलाना एक विशेष महत्व रखता है।

दिवाली के दिन सकारात्मक सोच और शांत मन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नकारात्मक विचार, झगड़े और विवाद किसी भी रूप में शुभ नहीं माने जाते। लोगों का मानना है कि अगर इस दिन मन में प्रेम, धैर्य और सहयोग की भावना रहे तो त्योहार की ऊर्जा घर और जीवन में खुशियाँ भर देती है। इसके विपरीत, ईर्ष्या, लालच और झगड़े से घर और मन में अशांति पैदा होती है और त्योहार का सार समाप्त हो जाता है।
इस दिन पर्यावरण का ध्यान रखना भी आवश्यक है। परंपरागत रूप से लोग पटाखों का इस्तेमाल करते आए हैं, लेकिन आज के समय में इसके दुष्प्रभावों को समझते हुए अधिकतर लोग पर्यावरण-अनुकूल और शांतिपूर्ण दिवाली मनाने की ओर बढ़ रहे हैं। दिवाली का असली महत्व केवल बाहरी रौशनी में नहीं बल्कि हमारे दिल और मन में सकारात्मक ऊर्जा जगाने में है। जब हम इस दिन अपने कर्मों और विचारों में संतुलन और अच्छाई बनाए रखते हैं, तब दिवाली वास्तव में जीवन को रोशन कर देती है और यह पर्व यादगार और सार्थक बन जाता है।
Diwali 2025: माता लक्ष्मी की विशेष पूजा विधि और आराधना
दिवाली का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान लक्ष्मी पूजा है, जिसे धन, समृद्धि और खुशियों की देवी माता लक्ष्मी के सम्मान में किया जाता है। इस दिन घर के प्रत्येक कोने को साफ-सुथरा और रोशन रखना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि यह माना जाता है कि माता लक्ष्मी स्वच्छ और सुव्यवस्थित वातावरण में ही निवास करती हैं। पूजा की तैयारी में घर की सजावट, दीपक जलाना और रंगोली बनाना शामिल है, जो न केवल माहौल को खूबसूरत बनाते हैं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा को भी आकर्षित करते हैं।
पूजा शुरू करने से पहले पूरे परिवार को स्नान करके साफ वस्त्र पहनने चाहिए। पूजा स्थल को फूलों, अक्षत, हल्दी-कुंकुम, फल और मिठाइयों से सजाना चाहिए। गणेश जी और लक्ष्मी माता की प्रतिमा या चित्र को पूजा स्थान पर स्थापित किया जाता है। पूजा में दीपक, धूप, अगरबत्ती और नैवेद्य का प्रयोग किया जाता है। मंत्रों का उच्चारण और आरती करना इस अनुष्ठान का मुख्य हिस्सा है, जिससे मन और घर में सकारात्मकता का संचार होता है।

पूजा के दौरान विशेष रूप से श्रीसुख मंत्र, लक्ष्मी मंत्र और गणेश मंत्र का जाप किया जाता है। यह विश्वास किया जाता है कि इन मंत्रों का उच्चारण घर में समृद्धि, सुख और शांति लाता है। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मिठाइयाँ, फल और दूर्वा अर्पित की जाती हैं। इसके साथ ही पूजा के समय घर में सभी सदस्य एकत्र होकर आशीर्वाद और मंगलकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
पूजा समाप्त होने के बाद दीपक और दीयों की रोशनी घर के चारों ओर फैलाई जाती है, जिससे अंधकार और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इस दिन का महत्व सिर्फ धन और समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार के सदस्यों के बीच एकता, प्रेम और सौहार्द बढ़ाने का अवसर भी है। लक्ष्मी पूजा 2025 में यदि यह विधि और अनुशासन के साथ पालन की जाए, तो यह न केवल त्योहार को आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष बनाती है, बल्कि पूरे वर्ष के लिए सुख, स्वास्थ्य और खुशियाँ भी सुनिश्चित करती है।
Digital Diwali 2025 – ऑनलाइन शुभकामनाएँ, वर्चुअल सेलिब्रेशन और नए ट्रेंड्स
Diwali का त्योहार अब केवल पारंपरिक रूपों तक सीमित नहीं रह गया है। Digital युग में 2025 की दिवाली लोगों के लिए तकनीक के माध्यम से जुड़ने और सेलिब्रेट करने का नया तरीका लेकर आई है। सोशल मीडिया, वीडियो कॉल्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से परिवार और दोस्तों के साथ वर्चुअल मिलन और शुभकामनाएँ भेजना अब आम हो गया है। इस डिजिटल जुड़ाव से चाहे लोग अलग-अलग शहरों या देशों में हों, वे भी एक-दूसरे के साथ त्योहार की खुशी साझा कर सकते हैं।
ऑनलाइन दिवाली शुभकामनाएँ भेजने के ट्रेंड में अब पर्सनलाइज्ड ई-कार्ड्स, GIFs, वीडियो मेसेज और वर्चुअल इवेंट्स शामिल हो गए हैं। लोग पारंपरिक मैसेज से हटकर क्रिएटिव और इंटरैक्टिव कंटेंट भेजते हैं, जिससे त्योहार और भी यादगार बन जाता है। इससे न केवल रिश्तों में गर्मजोशी बनी रहती है बल्कि समय और दूरी की बाधाएँ भी कम हो जाती हैं।

इसके साथ ही डिजिटल दिवाली के तहत वर्चुअल सेलिब्रेशन और ऑनलाइन गेम्स, ई-कैंडलिंग, लाइव डेकोरेशन और ऑनलाइन प्रतियोगिताएँ का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इससे बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी घर बैठे ही त्योहार का आनंद उठा सकते हैं। ऑनलाइन प्रतियोगिताओं और वर्चुअल पार्टीज़ के माध्यम से लोग पारिवारिक और सामाजिक जुड़ाव बनाए रखते हैं और इस अवसर को और भी खास बनाते हैं।
डिजिटल दिवाली का एक बड़ा लाभ यह भी है कि यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। बिना प्रदूषण फैलाए, बिना भारी भीड़ के और बिना अनावश्यक खर्च के, लोग अपने प्रियजनों के साथ खुशियाँ बांट सकते हैं। इस तरह 2025 की डिजिटल दिवाली सिर्फ तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि एक स्मार्ट, सुरक्षित और कनेक्टेड तरीके से उत्सव मनाने का नया ट्रेंड बन गई है।
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