
भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिने जाने वाले चेतेश्वर पुजारा ने आखिरकार सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। 37 साल के इस बल्लेबाज ने रविवार को X (Twitter) पर एक भावुक पोस्ट लिखकर अपने रिटायरमेंट की घोषणा की। पुजारा का नाम भारतीय टेस्ट क्रिकेट इतिहास में हमेशा उस बल्लेबाज के रूप में लिया जाएगा, जिसने अपने धैर्य, तकनीक और जुझारू रवैये से टीम इंडिया को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई।
चेतेश्वर पुजारा का अंतरराष्ट्रीय करियर
चेतेश्वर पुजारा ने भारत के लिए 103 टेस्ट और 5 वनडे मैच खेले। उन्होंने अपने करियर में कुल 7,195 टेस्ट रन बनाए, जिसमें 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं। उनका औसत 43.60 रहा और खास बात यह है कि भारत में खेलते हुए उन्होंने 52.58 की शानदार औसत से रन बनाए। यह आंकड़े बताते हैं कि पुजारा टीम इंडिया के लिए कितने भरोसेमंद बल्लेबाज थे।

उनका आखिरी मैच 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल था। इसके बाद से भारतीय टीम मैनेजमेंट ने नए चेहरों को मौका देना शुरू किया, लेकिन पुजारा लगातार सौराष्ट्र और काउंटी क्रिकेट (Sussex) में खेलते रहे।
चेतेश्वर पुजारा की यादगार पारियां
चेतेश्वर पुजारा का करियर कई यादगार पारियों से भरा हुआ है, जो भारतीय क्रिकेट इतिहास का हिस्सा बन चुकी हैं। 2012 में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला शतक लगाया और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2013 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जोहान्सबर्ग टेस्ट में उनकी 153 रनों की लंबी पारी आज भी क्रिकेट प्रेमियों की जुबान पर है।
इसके बाद 2015 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में उन्होंने 145 रनों की शानदार पारी खेली, जब टीम को ओपनिंग में मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा था। 2018 में इंग्लैंड के साउथैम्पटन में नाबाद 132 रनों की पारी उनकी सबसे बेहतरीन पारियों में गिनी जाती है, जब पूरे भारतीय बल्लेबाजी क्रम ने संघर्ष किया लेकिन पुजारा अकेले डटे रहे।
वहीं 2017 में रांची टेस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 525 गेंदों पर 202 रन बनाए और अपनी धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी से यह साबित कर दिया कि वे टेस्ट क्रिकेट की असली पहचान हैं। इन पारियों ने पुजारा को न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में टेस्ट क्रिकेट का सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज बना दिया।
चेतेश्वर पुजारा का ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीतों का हीरो
चेतेश्वर पुजारा का नाम हमेशा भारत की ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीतों के साथ जुड़ा रहेगा। 2018-19 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में उन्होंने तीन शतकीय पारियां खेलीं – एडिलेड, मेलबर्न और सिडनी में। उनकी बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलियाई धरती पर टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रचा।

पुजारा को उस सीरीज का “मैन ऑफ द सीरीज” चुना गया और उन्हें भारत की जीत का सबसे बड़ा हीरो माना गया। इसके बाद 2020-21 की ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज में पुजारा ने एक और यादगार योगदान दिया। भले ही उन्होंने शतक नहीं लगाया, लेकिन उन्होंने अपने शरीर पर दर्जनों गेंदें झेलते हुए लंबे समय तक क्रीज़ पर टिके रहकर टीम को सहारा दिया।
खासकर ब्रिस्बेन टेस्ट में उनकी 211 गेंदों पर 56 रनों की जुझारू पारी ने भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। पुजारा की इन पारियों ने साबित कर दिया कि वे चेतेश्वर पुजारा भारतीय क्रिकेट की दीवार हैं और ऑस्ट्रेलिया जैसी कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय टीम की रीढ़ की हड्डी बने रहे।
चेतेश्वर पुजारा का घरेलू क्रिकेट और काउंटी क्रिकेट
चेतेश्वर पुजारा सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट में भी लीजेंड रहे हैं। उन्होंने 278 फर्स्ट क्लास मैचों में कुल 21,301 रन बनाए। इसमें उनके नाम 66 शतक और तीन तिहरे शतक दर्ज हैं। यह आंकड़ा बताता है कि पुजारा लंबे फॉर्मेट के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक रहे।
सौराष्ट्र के लिए खेलते हुए उन्होंने कई बार टीम को रणजी ट्रॉफी दिलाई। इसके अलावा इंग्लैंड के काउंटी क्रिकेट में भी पुजारा का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। Sussex के लिए खेलते हुए उन्होंने कई बार टीम को मुश्किल हालात से निकाला और वहां के दर्शक भी उन्हें टेस्ट क्रिकेट का असली “आर्टिस्ट” मानते हैं।
चेतेश्वर पुजारा की भावुक विदाई पोस्ट

संन्यास की घोषणा करते हुए चेतेश्वर पुजारा ने X (Twitter) पर लिखा:
“भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना और हर बार मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देना – इसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। लेकिन जैसा कहते हैं, हर अच्छी चीज का अंत होता है। मैं आभार के साथ भारतीय क्रिकेट से संन्यास ले रहा हूं।”
आश्वीकरण – चेतेश्वर पुजारा जो भारतीय क्रिकेट की दीवार का अंत
चेतेश्वर पुजारा ने भारतीय क्रिकेट को वह भरोसा दिया, जिसकी तुलना केवल राहुल द्रविड़ से की जा सकती है। उन्होंने दिखाया कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ रन बनाने का नाम नहीं, बल्कि धैर्य और मानसिक मजबूती का खेल है।आज जब वे क्रिकेट को अलविदा कह रहे हैं, तो उनका नाम हमेशा याद किया जाएगा। पुजारा की लंबी पारियां, शरीर पर गेंदें खाने के बाद भी क्रीज़ पर डटे रहने का जज्बा और टीम के लिए खुद को कुर्बान करने वाली सोच उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे खास खिलाड़ियों में शामिल करती है।
चेतेश्वर पुजारा अब भले ही मैदान पर नजर न आएं, लेकिन उनकी विरासत, उनकी पारियां और उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे।
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