
10 नवंबर 2025 की शाम को दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिला दिया। यह विस्फोट लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुआ, जब एक सफेद कार अचानक आग के गोले में तब्दील हो गई। धमाके की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि पुरानी दिल्ली और चांदनी चौक तक लोग इसे सुन पाए। कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका धुएं और अफरा-तफरी से भर गया।
लाल किला, जो भारत की पहचान है, उसके पास इस तरह का धमाका होना किसी चेतावनी से कम नहीं था। दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर यह विस्फोट न केवल लोगों की सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आतंक या साजिश अब ऐतिहासिक स्थलों को निशाना बना रही है। इस पूरे इलाके में कुछ समय के लिए मेट्रो और यातायात रोक दिया गया, जबकि सुरक्षा बलों ने इलाके को तुरंत घेर लिया।
दिल्ली की सड़कों पर तबाही का मंजर
दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट के बाद जो दृश्य सामने आया, वह किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं था। विस्फोट के बाद कार पूरी तरह जलकर खाक हो गई थी, जबकि आसपास खड़ी पांच से छह गाड़ियाँ भी आग की लपटों में घिर गईं। सड़क पर बिखरे शीशे, जले हुए मलबे और चीखते लोग, हर तरफ सिर्फ अफरा-तफरी थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, “पहले एक धमाका हुआ, फिर तेज़ आग और उसके बाद सबकुछ काला धुआं बन गया।” कई लोग घायल अवस्था में सड़क पर पड़े थे, कुछ लोग अपने प्रियजनों को ढूंढ रहे थे। ट्रैफिक रुक गया, दुकानों के शटर गिरा दिए गए और पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया।
दमकल विभाग की आठ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब 45 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। मेडिकल टीमों ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार शुरू किया। दिल्ली पुलिस ने चारों ओर बैरिकेड लगाकर मीडिया और आम जनता की एंट्री रोक दी। उस समय लाल किला मेट्रो स्टेशन पर भारी भीड़ थी, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
घटनास्थल के पास मौजूद सीसीटीवी कैमरे से शुरुआती फुटेज मिली, जिसमें एक संदिग्ध कार को धमाके से लगभग आधा घंटा पहले पार्क करते देखा गया। जांच एजेंसियां अब उसी दिशा में सुराग तलाश रही हैं। लोगों का कहना था कि यह विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि कुछ क्षणों के लिए लगा मानो कोई भूकंप आ गया हो। दिल्ली जैसे शहर में यह घटना सुरक्षा और इंटेलिजेंस नेटवर्क की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाती है।
मौतें, घायल और इलाज की जद्दोजहद
दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट में अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बीस से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में कुछ पर्यटक, स्थानीय दुकानदार और ऑटो ड्राइवर शामिल हैं जो उस समय आसपास मौजूद थे। कई लोगों के शरीर के हिस्से झुलस गए हैं और कुछ की हालत अभी भी नाज़ुक बताई जा रही है।

घटना के तुरंत बाद एम्बुलेंस की लाइन लग गई। एलएनजेपी, जीटीबी और लोक नायक अस्पतालों में आपातकालीन स्थिति घोषित कर दी गई। डॉक्टरों और नर्सों ने देर रात तक लगातार इलाज किया। घायल लोगों में कई ऐसे थे जिन्होंने अपने परिवारवालों को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन नेटवर्क ठप होने के कारण संपर्क नहीं हो पा रहा था।
अस्पतालों में माहौल बेहद भावनात्मक था। एक पिता अपने बेटे की खबर के लिए रो रहा था, एक महिला बेहोश पड़ी थी क्योंकि उसने अपने पति को मौके पर खो दिया था। सोशल मीडिया पर दिल्लीवासियों ने रक्तदान के लिए अपीलें कीं, और सैकड़ों लोग अस्पतालों में लाइन में लगे। यह हादसा न केवल जानलेवा था, बल्कि इंसानियत की परीक्षा भी बन गया।
सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजा और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया और कहा, “यह सिर्फ एक ब्लास्ट नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम की कमज़ोरी का आईना है।”
दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट- क्या यह हादसा था या साजिश?
यह सवाल अब हर किसी के मन में है, क्या दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट एक हादसा था या साजिश का हिस्सा? शुरुआती जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि कार में कोई गैस सिलेंडर नहीं था। फॉरेंसिक टीम को विस्फोटक पदार्थ के टुकड़े मिले हैं, जो यह इशारा करते हैं कि कार में बम रखा गया हो सकता है।

कार हरियाणा रजिस्ट्रेशन की थी और उसका मालिक पुलिस हिरासत में है। हालांकि, मालिक का कहना है कि उसकी कार कुछ दिन पहले चोरी हो गई थी। अब जांच इस दिशा में बढ़ रही है कि क्या चोरी की यह कार पहले से किसी साजिश के तहत तैयार की गई थी।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल और NIA दोनों एजेंसियां इस ब्लास्ट की जांच कर रही हैं। IB और RAW ने भी इस मामले में अपनी रिपोर्ट तैयार करनी शुरू की है। जांच एजेंसियों ने कुछ संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड्स को ट्रेस किया है जो धमाके से कुछ घंटे पहले सक्रिय थे।
कुछ सूत्रों का कहना है कि यह धमाका किसी आतंकी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है जो राजधानी की सुरक्षा को चुनौती देना चाहता था। हाल के महीनों में दिल्ली में सुरक्षा अलर्ट कई बार जारी किए गए थे, लेकिन यह ब्लास्ट उन चेतावनियों को हकीकत में बदल गया।
दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट – सुरक्षा पर गंभीर सवाल
लाल किला भारत की गरिमा और गौरव का प्रतीक है। हर साल प्रधानमंत्री यहां से तिरंगा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं। ऐसे में दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट का होना न सिर्फ एक सुरक्षा चूक है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लाल किला परिसर और उसके आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरे खराब थे। स्थानीय प्रशासन ने पिछले महीने ही निगरानी व्यवस्था सुधारने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अभी तक उस पर काम नहीं हो सका।
इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल उठने लगे हैं। आखिर इतनी निगरानी के बावजूद एक संदिग्ध कार इतनी देर तक वहां कैसे खड़ी रही? दिल्ली पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या धमाके के लिए रिमोट कंट्रोल या टाइमर डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों ने अब लाल किला, इंडिया गेट, संसद भवन और प्रमुख सरकारी कार्यालयों के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। मेटल डिटेक्टर, बम स्क्वॉड और स्निफर डॉग्स की तैनाती बढ़ा दी गई है।
अब क्या होगी जांच की दिशा और एजेंसियों की भूमिका
दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट की जांच अब पूरी तरह से बहु-स्तरीय हो चुकी है। NIA, दिल्ली पुलिस का स्पेशल सेल, फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) और इंटेलिजेंस ब्यूरो सभी इस केस पर काम कर रहे हैं। घटनास्थल से मिले मलबे का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है, जिसमें विस्फोटक सामग्री के निशान पाए गए हैं।
सीसीटीवी फुटेज में धमाके से करीब आधे घंटे पहले एक व्यक्ति कार से उतरता दिख रहा है। अभी तक उसकी पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने दिल्ली और हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में छापेमारी तेज कर दी है।
एनआईए की रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई है कि यह ब्लास्ट किसी बाहरी संगठन द्वारा वित्तपोषित हो सकता है। पिछले महीने गुरुग्राम में बरामद की गई विस्फोटक सामग्री और इस घटना के बीच कड़ी तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियों को एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए कुछ संदिग्ध संदेश भी मिले हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को सतर्क रहने का निर्देश जारी किया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने कहा, “हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक इस ब्लास्ट के पीछे के हर व्यक्ति को पकड़ नहीं लिया जाता।”
लोगों की आंखों में डर और उम्मीद
दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट के बाद लोगों के दिलों में डर के साथ-साथ गुस्सा और बेचैनी भी है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही थीं। वहीं, राहत और बचाव कर्मियों की त्वरित कार्रवाई ने कई जिंदगियां बचा लीं। दमकल कर्मियों और पुलिस ने बिना किसी हिचकिचाहट के आग की लपटों के बीच फंसे लोगों को बाहर निकाला। कई स्थानीय लोगों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया।
दिल्ली के लोगों में डर साफ झलकता है, लेकिन उनके भीतर उम्मीद भी बाकी है कि इस घटना का सच जल्द सामने आएगा। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राजधानी के नागरिकों ने एक बार फिर साबित किया है कि कठिन समय में भी दिल्ली की आत्मा नहीं टूटती।
क्या दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट से मिली चेतावनी ?
दिल्ली में लाल किला कार ब्लास्ट सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यह घटना बताती है कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था में अभी भी कई कमजोरियां हैं। तकनीकी निगरानी, गश्त और इंटेलिजेंस नेटवर्क को और मज़बूत करने की जरूरत है।
सरकार को चाहिए कि इस घटना को एक सबक की तरह लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा की नीति में बदलाव करे। इस घटना ने यह भी दिखाया है कि नागरिक सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण है। अगर आसपास के लोग समय रहते रिपोर्ट करते, तो शायद यह धमाका टाला जा सकता था।
यह ब्लास्ट हमें यह याद दिलाता है कि आतंकवाद और असुरक्षा किसी एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है। दिल्ली संभल जाएगी, लेकिन लाल किला कार ब्लास्ट की गूंज इतिहास के पन्नों में हमेशा दर्ज रहेगी — एक ऐसी याद के रूप में, जिसने हमें सुरक्षा की असल कीमत सिखाई।
